क़िबला (काबा) वह मुक़द्दस (पवित्र) दिशा है जिसकी तरफ दुनिया भर के मुसलमान नमाज़ के वक़्त अपना रुख़ करते हैं। चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में हों, अपनी नमाज़ के सही होने के लिए क़िबला की सही दिशा मालूम करना फ़र्ज़ है।
दिशा जानने के पुराने तरीके
स्मार्टफोन के दौर से पहले, मुसलमान कुदरत (प्रकृति) की मदद से क़िबला खोजते थे। ये तरीके आज भी एक आम अंदाज़ा लगाने के लिए मुफ़ीद (फायदेमंद) हैं:
- सूरज से: सूरज पूरब से निकलता है और पश्चिम में डूबता है। भारत और दक्षिण एशिया के ज़्यादातर हिस्सों से मक्का (क़िबला) पश्चिम (West) की तरफ है।
- मस्जिद की मेहराब: हर मस्जिद में इमाम के खड़े होने की जगह (मेहराब) बिल्कुल क़िबला की तरफ बनी होती है।
- तारों की मदद से: रात के समय पुराने ज़माने में लोग ध्रुव तारे (Pole Star) की मदद से उत्तर दिशा का पता लगाकर क़िबला का अंदाज़ा लगाते थे।
आज का सबसे सही तरीका: GPS कंपास
आजकल बंद कमरों, बड़े शहरों या बादलों वाले दिनों में पुराने तरीके काम नहीं आते। आम मैग्नेटिक कंपास भी लोहे और बिल्डिंग के तारों (magnetic fields) की वजह से ग़लत दिशा बता सकता है।
आज सबसे भरोसेमंद तरीका एक GPS-आधारित क़िबला फाइंडर है। यह तकनीक आपकी जगह (Location) के हिसाब से सीधे मक्का का एंगल निकाल कर आपको बिल्कुल सही दिशा बताती है।
सही दिशा पाने के लिए कुछ टिप्स:
- अपने फोन को अपनी हथेली पर बिल्कुल सीधा और ज़मीन के समानांतर (flat) रखें।
- फोन को भारी लोहे की चीज़ों, कंप्यूटर या स्पीकर से दूर रखें।
- अगर सुई अटक रही हो, तो फोन को हवा में "8" के आकार (figure 8) में घुमाकर कंपास को कैलिब्रेट (Calibrate) करें।